- 20 बेड से शुरू हुआ सफर
- रोजाना 50 किलो मशरूम उत्पादन
- वेस्ट से बनाया जीरो-वेस्ट मॉडल
महाराष्ट्र की पूर्व माइक्रोबायोलॉजी प्रोफेसर और बॉटनी में गोल्ड मेडलिस्ट तृप्ति भूषण धकाते ने नौकरी छोड़कर मशरूम की खेती को अपना कारोबार बना लिया। साल 2018 में पुणे से शुरू हुए उनके इस सफर की शुरुआत महज 20 ऑयस्टर मशरूम बेड से हुई थी।
शुरुआती दौर में उन्होंने करीब 45 दिनों में तीन फ्लश के जरिए लगभग 20 किलो मशरूम का उत्पादन किया। ग्राहकों तक उत्पाद पहुंचाना बड़ी चुनौती थी, इसलिए तृप्ति खुद पुणे की सब्जी मंडियों में जाकर लोगों को मशरूम की सब्जी के सैंपल देती थीं और इसके स्वाद व फायदों के बारे में बताती थीं। बाद में सोशल मीडिया और होम डिलीवरी के जरिए कारोबार बढ़ने लगा।
आज उनके Quality Mushroom वेंचर में रोजाना करीब 50 किलो मशरूम का उत्पादन होता है और मासिक टर्नओवर लगभग ₹4 लाख बताया जाता है। कारोबार अब मशरूम पापड़, ब्रेड, खाखरा, बिस्किट और कुकीज जैसे वैल्यू-एडेड उत्पादों तक फैल चुका है।
तृप्ति मशरूम की खेती के बाद बचे बेड का इस्तेमाल वर्मी-कम्पोस्ट बनाने में भी करती हैं। कृषि कचरे को जलाने से होने वाले प्रदूषण को कम करने की सोच से प्रेरित होकर उन्होंने खेती को जीरो-वेस्ट मॉडल से जोड़ने की कोशिश की।
अपने कारोबार के साथ तृप्ति अब तक सैकड़ों लोगों को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण भी दे चुकी हैं। उनका मानना है कि कम जगह में मशरूम उगाकर महिलाएं और छोटे परिवार भी अतिरिक्त आय का जरिया बना सकते हैं।


