- सुपरनोवा आंकड़ों ने बढ़ाई वैज्ञानिकों की चिंता
- ब्रह्मांड के फैलाव में तेजी पर सवाल
- नई रिसर्च से वैज्ञानिकों में मतभेद
नई दिल्ली। ब्रह्मांड के लगातार तेज गति से फैलने की वजह मानी जाने वाली डार्क एनर्जी को लेकर नई रिसर्च ने वैज्ञानिकों के सामने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। शोधकर्ताओं ने 1,700 से अधिक Type Ia सुपरनोवा के आंकड़ों का दोबारा विश्लेषण किया है। उनका दावा है कि सुपरनोवा की चमक पर उनके मूल तारों की उम्र के प्रभाव को शामिल करने पर ब्रह्मांड के तेजी से फैलने का प्रमाण कमजोर पड़ जाता है।
टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR), मुंबई और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से जुड़े शोधकर्ताओं ने Pantheon+ डेटासेट का अध्ययन किया। उनके अनुसार, ब्रह्मांड के फैलाव में तेजी का संकेत मुख्य रूप से उस दिशा में दिखाई देता है, जिस दिशा में हमारा स्थानीय समूह गति कर रहा है। दूरी बढ़ने के साथ यह प्रभाव कमजोर होता जाता है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि यदि यह प्रभाव वास्तव में दिशात्मक है, तो इसे मानक डार्क एनर्जी मॉडल से समझाना मुश्किल होगा। हालांकि, डार्क एनर्जी को खारिज करने की स्थिति अभी नहीं आई है। एक अन्य अध्ययन अब भी ब्रह्मांड के त्वरित विस्तार का समर्थन करता है। ऐसे में वैज्ञानिकों के बीच इस मुद्दे पर फिलहाल मतभेद कायम हैं।
आने वाले वर्षों में Rubin Observatory के LSST मिशन से मिलने वाले लाखों खगोलीय पिंडों और बड़ी संख्या में सुपरनोवा के आंकड़े इस बहस को निर्णायक दिशा दे सकते हैं। इससे पता चल सकेगा कि ब्रह्मांड वास्तव में तेजी से फैल रहा है, धीमा हो रहा है या मौजूदा संकेत किसी स्थानीय प्रभाव का परिणाम हैं।


