- लंबित चालान से कानूनी कार्रवाई संभव
- कोर्ट में पहुंच सकता है मामला
- वाहन बेचने में भी आ सकती दिक्कत
वाहन का ई-चालान कटने के बाद उसे नजरअंदाज करना महंगा पड़ सकता है। चालान की जानकारी वाहन के पंजीकरण रिकॉर्ड में दर्ज रहती है और तय समय में भुगतान नहीं करने पर कुछ मामलों में अतिरिक्त जुर्माना या कानूनी कार्रवाई की स्थिति बन सकती है।
समय पर चालान जमा नहीं होने पर ट्रैफिक विभाग मामले को ट्रैफिक मजिस्ट्रेट की अदालत में भेज सकता है। कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद वाहन मालिक या संबंधित व्यक्ति को सुनवाई के लिए उपस्थित होना पड़ सकता है। अनुपस्थित रहने पर अदालत समन जारी कर सकती है और मामले में आगे की कार्रवाई हो सकती है।
लंबे समय तक चालान लंबित रहने पर वाहन का रिकॉर्ड फ्लैग किया जा सकता है, जिससे आरसी से जुड़े कुछ काम प्रभावित हो सकते हैं। गंभीर यातायात उल्लंघन, जैसे खतरनाक ड्राइविंग, अत्यधिक तेज गति या नशे में वाहन चलाने के मामलों में ड्राइविंग लाइसेंस पर भी कार्रवाई हो सकती है।
लंबित चालान का असर वाहन बेचते समय भी पड़ सकता है। खरीदार वाहन का रिकॉर्ड जांच सकता है और बकाया चालान सामने आने पर सौदे की कीमत कम कर सकता है या खरीद से पीछे हट सकता है। इसलिए वाहन मालिकों को समय-समय पर चालान का स्टेटस जांचकर ऑनलाइन भुगतान योग्य चालान तुरंत जमा कर देना चाहिए। कोर्ट में भेजे गए चालान के लिए संबंधित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है।


