- ब्राजील में 45 साल में भूजल गिरा
- अर्जेंटीना में आसपास का पानी भी खिंचा
- उरुग्वे में जल उपलब्धता 35% घटी
ब्रासीलिया। तेजी से बढ़ने वाले यूकेलिप्टस के पेड़ अब सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों में पर्यावरणीय चिंता का कारण बन रहे हैं। अफ्रीका से दक्षिण अमेरिका तक बड़े पैमाने पर लगाए गए यूकेलिप्टस के बागानों का भूजल, मिट्टी और स्थानीय जल उपलब्धता पर प्रतिकूल असर सामने आया है।
ब्राजील के मिनास गैरेस में 45 वर्षों के दौरान यूकेलिप्टस वाले क्षेत्र में भूजल स्तर करीब 4.5 मीटर नीचे चला गया। स्थानीय लोग ऐसे इलाकों को ‘हरा रेगिस्तान’ कहने लगे हैं।
अर्जेंटीना के पम्मास क्षेत्र में 40 हेक्टेयर के यूकेलिप्टस बागान के अध्ययन में पाया गया कि आसपास के घास के मैदानों की तुलना में भूजल 0.5 मीटर से अधिक नीचे था। पेड़ों के कारण आसपास से भी पानी बागान की ओर खिंचने के संकेत मिले।
उरुग्वे में 20 साल के अध्ययन के दौरान यूकेलिप्टस और पाइन वाले जलग्रहण क्षेत्र में घास के मैदान की तुलना में पानी की उपलब्धता 35 प्रतिशत कम पाई गई। वहीं रवांडा में यूकेलिप्टस के बड़े पैमाने पर रोपण को मिट्टी से पोषक तत्वों के अधिक अवशोषण और जल उपयोग को लेकर चिंता से जोड़ा गया है।


