- बाढ़ ने उजाड़े कई परिवार
- 12 वर्षीय त्सेरिंग अकेला
- माता-पिता की मौत अनजान
नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने रासुवा इलाके में भारी तबाही मचाई।
इस आपदा के बाद सैकड़ों लोग विस्थापित हुए और कई बस्तियां पूरी तरह तबाह हो गईं।
12 वर्षीय त्सेरिंग भी अपनी बड़ी मौसी और दादी के साथ सुरक्षित स्थान पर रह रहा है।
- त्सेरिंग को सच नहीं बताया
- जंगल जाने की बात
- वापसी की उम्मीद बाकी
त्सेरिंग के माता-पिता कम्मी और फुरसांग अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उसे यह सच्चाई नहीं बताई गई है।
परिवार के बुजुर्गों ने उससे कहा है कि उसके माता-पिता जंगल गए हैं और रास्ते खराब होने के कारण लौटने में समय लगेगा।
त्सेरिंग अब भी विश्वास करता है कि उसके माता-पिता एक दिन वापस घर लौट आएंगे।
- आसपास रोते लोग दिखते
- सवाल करता मासूम बच्चा
- इंतजार में बीत रहे दिन
जब त्सेरिंग आसपास के लोगों को रोते हुए देखता है, तो वह उनसे रोने की वजह पूछता है।
कभी-कभी वह खुद भी रोने लगता है और माता-पिता के बारे में पूछता है।
उसे अब भी यही बताया जाता है कि जंगल में गए उसके माता-पिता तक पहुंचना संभव नहीं है।
- मठ में 520 लोग
- घर और सड़कें तबाह
- हर तरफ गहरा दुख
रासुवा के करीब 520 विस्थापित लोग इस समय काठमांडू के एक मठ में रह रहे हैं।
बाढ़ ने उनके घरों और बस्तियों को तबाह करने के साथ सड़क और पुलों को भी नुकसान पहुंचाया है।
मठ में बचे लोगों की बातचीत, बच्चों की चिंता और बुजुर्गों की खामोशी इस त्रासदी का दर्द बयां कर रही है।


