- केरोसिन और भाप से चलने वाला डिजाइन
- तीन रेगुलेटर से होता था नियंत्रण
- ईंधन की खपत में करीब 20% बचत
मध्य प्रदेश के देवसर के कक्षा 11 के छात्र व्यासजी मिश्रा ने महज 16 साल की उम्र में एक ऐसा हाइब्रिड स्टोव तैयार किया, जिसने विज्ञान जगत का ध्यान खींचा। इस स्टोव में शुरुआत में गर्मी पैदा करने के लिए केरोसिन का इस्तेमाल किया जाता था, जबकि पानी को भाप में बदलकर वैकल्पिक ऊष्मा स्रोत के रूप में उपयोग किया जाता था। वर्ष 2003 में इस आविष्कार को विज्ञान प्रदर्शनी में प्रथम पुरस्कार मिला।
हालांकि, यह स्टोव केवल पानी से चलने वाला उपकरण नहीं था। इसका उद्देश्य भाप के इस्तेमाल के जरिए केरोसिन की खपत कम करना था। बाद की जांच में इसके प्रोटोटाइप से करीब 20% तक केरोसिन की बचत सामने आई, जिससे इसे पानी से चलने वाले स्टोव के बजाय ईंधन-कुशल हाइब्रिड स्टोव कहना अधिक सही है।
व्यासजी ने अपने बड़े भाई पवनजी के साथ मिलकर करीब छह महीने में इसका प्रोटोटाइप तैयार किया। इसमें दो टैंक, एक बर्नर और तीन रेगुलेटर लगाए गए थे। एक रेगुलेटर केरोसिन, दूसरा पानी और तीसरा बर्नर को नियंत्रित करता था। इस नवाचार को आगे चलकर नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन से भी समर्थन मिला।


