- 65 की उम्र में सीखा ऑटो चलाना
- चार बच्चों को अकेले पाला
- मेहनत से कायम की आत्मनिर्भरता
महाराष्ट्र के कराड-उंडाळे मार्ग पर 65 वर्षीय मंगलाआवले, जिन्हें प्यार से ‘मंगला आजी’ कहा जाता है, रोज ऑटो रिक्शा चलाती हैं। उन्होंने 65 की उम्र में अपने बेटे की मदद से महज 15 दिनों में ऑटो चलाना सीखा और इसके बाद खुद का काम शुरू कर दिया।
पति के निधन के बाद मंगलाआजी ने मजदूरी करके अपने चार बच्चों की परवरिश की। उम्र बढ़ने के बावजूद वह आर्थिक रूप से बच्चों पर निर्भर नहीं रहना चाहती थीं। अपनी दवाइयों और परिवार की जरूरतों में मदद के लिए उन्होंने ऑटो चलाने का फैसला किया।
मंगलाआजी रोज सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक ऑटो चलाती हैं और करीब 500 से 700 रुपये प्रतिदिन कमाती हैं। उनका कहना है कि घर पर खाली बैठने से बेहतर है कि मेहनत करके खुद की जरूरतें पूरी की जाएं।
पुरुषों के दबदबे वाले इस पेशे में मंगलाआजी की मौजूदगी लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है। यात्री उनका सम्मान करते हैं और साथी चालक भी उन्हें आगे निकलने का मौका देते हैं। उनका सफर बताता है कि आत्मनिर्भर बनने की कोई उम्र नहीं होती और हिम्मत हो तो जिंदगी के किसी भी पड़ाव पर नई शुरुआत की जा सकती है।


