- बड़े कारोबारियों पर लग सकता है MDR
- छोटे दुकानदारों और यूजर्स को राहत
- बैंक-पेमेंट कंपनियों में बंटेगी फीस
यूपीआई भुगतान व्यवस्था में छह साल बाद बदलाव की तैयारी है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बड़े कारोबारियों से जुड़े यूपीआई लेनदेन पर 40 बेसिस पॉइंट (0.40 प्रतिशत) मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, यह प्रस्ताव अभी लागू नियम नहीं है।
बड़े कारोबारियों पर ही संभावित असर
प्रस्ताव के अनुसार, सालाना 1 से 1.5 करोड़ रुपये से अधिक कारोबार वाले बड़े मर्चेंट्स पर यह शुल्क लागू हो सकता है। साथ ही 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन को इसके दायरे में लाने की बात कही जा रही है।
आम यूजर और छोटे दुकानदार रहेंगे बाहर
दो लोगों के बीच होने वाले यूपीआई भुगतान और छोटे दुकानदारों से किए जाने वाले सामान्य भुगतान पर इसका असर नहीं पड़ने की बात कही गई है। यानी दोस्त को पैसे भेजने या छोटे दुकानदार के क्यूआर कोड से भुगतान करने पर शुल्क नहीं लगेगा।
फीस का बंटवारा तीन हिस्सों में
प्रस्तावित 0.40 प्रतिशत MDR में 40 प्रतिशत हिस्सा भुगतान करने वाले बैंक, 30 प्रतिशत पेमेंट ऐप और 30 प्रतिशत मर्चेंट के बैंक को मिलने की बात कही गई है। जनवरी 2020 से यूपीआई और रुपे डेबिट कार्ड पर MDR शून्य है। प्रस्तावित बदलाव का उद्देश्य भुगतान से जुड़े बैंकों और कंपनियों की लागत की भरपाई करना बताया जा रहा है।


