- ब्रेक फेल होने पर भी मिल सकता मुआवजा
- नो-फॉल्ट लायबिलिटी के तहत मिलेगा लाभ
- क्लेम के लिए ये दस्तावेज जरूरी
सड़क हादसे देश में आम घटनाओं में शामिल हैं। दुर्घटना के बाद लोग अक्सर बीमा कंपनी से नुकसान की भरपाई के लिए क्लेम करते हैं। आम धारणा है कि बीमा क्लेम तभी मिलता है, जब हादसा चालक की लापरवाही या तेज रफ्तार के कारण हुआ हो। लेकिन अगर वाहन के ब्रेक अचानक फेल हो जाएं और गंभीर दुर्घटना हो जाए, तो क्या पीड़ित या उसके परिवार को मुआवजा मिल सकता है?
सिक्किम हाईकोर्ट ने ऐसे ही एक मामले में अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि चालक की लापरवाही साबित नहीं होने पर भी नो-फॉल्ट लायबिलिटी के आधार पर मुआवजा दिया जा सकता है। अदालत ने मोटर वाहन अधिनियम की धारा 140 के तहत इस व्यवस्था को स्पष्ट किया।
अदालत के मुताबिक, ब्रेक फेल होना एक यांत्रिक खराबी है और इसे चालक की जानबूझकर की गई गलती नहीं माना जा सकता। ऐसी स्थिति में बीमा कंपनी वाहन मालिक की वैधानिक देनदारी से पूरी तरह बच नहीं सकती और लागू बीमा कवर के अनुसार पीड़ित के परिवार को मुआवजा देना पड़ सकता है।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति भास्कर राज प्रधान ने बीमा प्रमाणपत्रों और पॉलिसी की शर्तों में इस्तेमाल होने वाली जटिल भाषा पर भी चिंता जताई। अदालत ने कहा कि बीमा कंपनियों को नियम और कवरेज की शर्तें इतनी सरल और स्पष्ट रखनी चाहिए कि ग्राहक आसानी से अपने अधिकार और बीमा की सीमा समझ सकें।
क्लेम के लिए दुर्घटना के तुरंत बाद स्थानीय पुलिस में एफआईआर दर्ज कराना और पंचनामा तैयार करवाना महत्वपूर्ण है। साथ ही बीमा कंपनी को हादसे की सूचना दें और वाहन की खराबी की पुष्टि के लिए मैकेनिकल इंस्पेक्शन रिपोर्ट हासिल करें। ये दस्तावेज बीमा कंपनी या मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के सामने दावा साबित करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
हालांकि, वास्तविक क्लेम पॉलिसी के प्रकार, कवरेज, हादसे की परिस्थितियों और लागू कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करता है। इसलिए किसी भी दावे से पहले अपनी पॉलिसी की शर्तों और लागू नियमों को ध्यान से जांचना जरूरी है।


