- खैबर पख्तूनख्वा में गंभीर अत्याचार के आरोप
- पीटीएम नेताओं की गिरफ्तारी पर जताई चिंता
- सैन्य बलों पर आतंकियों को संरक्षण देने का आरोप
जिनेवा, 9 सितंबर: पश्तून कार्यकर्ता फजल-उर-रहमान अफरीदी ने पाकिस्तान की सरकार और सेना पर पश्तूनों तथा बलूचों समेत जातीय अल्पसंख्यकों के खिलाफ व्यापक मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगाया है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) के 63वें सत्र से इतर बोलते हुए अफरीदी ने दावा किया कि खैबर पख्तूनख्वा के पश्तून बहुल इलाकों में जबरन गायब किए जाने, कथित फर्जी मुठभेड़ों में हत्याओं और ड्रोन तथा हेलीकॉप्टर हमलों की घटनाएं आम हो गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन हमलों में बच्चों समेत आम नागरिक भी मारे गए हैं।
अफरीदी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान पर दबाव बनाने की अपील करते हुए इन घटनाओं को गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन और अत्याचार बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की सेना खैबर पख्तूनख्वा, बलूचिस्तान और अफगानिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठनों को संरक्षण और समर्थन दे रही है।
उन्होंने बन्नू और लक्की मारवत के पुलिस अधिकारियों के कथित बयानों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि सुरक्षा बल आतंकियों को सैन्य छावनी क्षेत्रों में लाकर उन्हें पनाह देते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि सैन्यकर्मी आम लोगों के बीच भेष बदलकर काम करते हैं, जिससे स्थानीय आबादी में असुरक्षा पैदा होती है।
अफरीदी ने पश्तून तहफ्फुज मूवमेंट (पीटीएम) से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी तथा कथित गुमशुदगी पर भी चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि पीटीएम नेताओं को मनगढ़ंत आरोपों में हिरासत में लिया गया है, जबकि कुछ कार्यकर्ताओं के जबरन गायब किए जाने का आरोप है।
उन्होंने पीटीएम नेता मंजूर अहमद पश्तीन की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई और पाकिस्तान सरकार से हिरासत में लिए गए या लापता कार्यकर्ताओं को सामने लाने तथा उनकी स्थिति और ठिकाने की जानकारी देने की मांग की।
अफरीदी ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान का सुरक्षा प्रतिष्ठान पश्तून क्षेत्रों को अस्थिर करने, स्थानीय आबादी को विस्थापित करने और खनिज संपदा से समृद्ध क्षेत्रों पर नियंत्रण हासिल करने की व्यापक रणनीति पर काम कर रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि खनिजों से होने वाला राजस्व पाकिस्तानी खजाने में जाने के बजाय वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के हितों में इस्तेमाल किया जा रहा है। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।


