- भारत के छात्र प्रदर्शनों पर यूएन की प्रशंसा
- पाकिस्तान में दमन पर यूएन ने जताई चिंता
- चीन से मानवाधिकार सुधार की अपील
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने नई दिल्ली में हालिया छात्र-नेतृत्व वाले प्रदर्शनों से निपटने के भारत के तरीके की सराहना की। उन्होंने कहा कि युवाओं के नेताओं के साथ संवाद करना अत्यधिक बल प्रयोग की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी तरीका है।
7 सितंबर को जिनेवा में मानवाधिकार परिषद के 63वें सत्र को संबोधित करते हुए तुर्क ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सूचना तक पहुंच को सरकारों तथा नागरिकों के बीच विश्वास कायम करने के लिए महत्वपूर्ण बताया।
इसके विपरीत, तुर्क ने पाकिस्तान में प्रदर्शनों से निपटने के दौरान कथित अत्यधिक घातक बल और मनमानी हिरासत को लेकर चिंता जताई। उन्होंने चीन के शिनजियांग क्षेत्र में मानवाधिकारों की स्थिति, हिरासत केंद्रों और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त की।
तुर्क ने तिब्बती लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता पर बढ़ती पाबंदियों को भी उठाया। इसके अलावा उन्होंने ईरान, निकारागुआ, रूस, अजरबैजान, जॉर्जिया, ट्यूनीशिया और युगांडा में नागरिक स्वतंत्रताओं तथा राजनीतिक गतिविधियों पर बढ़ते प्रतिबंधों की आलोचना की।
यूएन मानवाधिकार प्रमुख ने जोर दिया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन और नागरिक भागीदारी को जनता की नाराजगी और सरकारों के बीच संवाद का माध्यम बनना चाहिए, ताकि लोगों की आकांक्षाओं को सार्थक बदलाव में बदला जा सके।


