- आवाज उठाने से नेतृत्व करने तक भारत
- डिजिटल नवाचार से ग्लोबल साउथ मजबूत
- लचीले और समावेशी सहयोग पर जोर
नई दिल्ली, 9 सितंबर: भारत जब इस सप्ताह BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी की तैयारी कर रहा है, तब वैश्विक मंच पर नई दिल्ली की भूमिका में बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है। कभी अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में अधिक प्रतिनिधित्व और सुधारों की मांग करने वाला भारत अब उभरती अर्थव्यवस्थाओं और ग्लोबल साउथ के लिए व्यावहारिक और बड़े स्तर पर लागू किए जा सकने वाले समाधान पेश करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
भारत ने BRICS की अपनी शुरुआती अध्यक्षताओं के दौरान अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण और न्यायसंगत बनाने की लगातार वकालत की। इन्हीं प्रयासों के बीच न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) और कंटिजेंट रिजर्व अरेंजमेंट (CRA) जैसे संस्थागत तंत्र मजबूत हुए, जिन्होंने उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच वित्तीय सहयोग को नया आधार दिया।
इसके बाद कोरोना महामारी ने भारत की भूमिका को एक नया आयाम दिया। वैक्सीन कूटनीति और डिजिटल स्वास्थ्य समाधानों को साझा करके भारत ने खुद को केवल वैश्विक सहयोग का लाभार्थी नहीं, बल्कि संकट के समय समाधान देने वाले देश के रूप में भी स्थापित किया।
2026 में भारत एक बार फिर BRICS की अध्यक्षता कर रहा है। इस बार इसकी थीम “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” रखी गई है। इसके तहत भारत अपने घरेलू अनुभवों और सफल मॉडलों को BRICS साझेदारों के साथ साझा करने पर जोर दे रहा है।
BRICS चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (BRICS CCI) के चेयरमैन समीप शास्त्री ने कहा कि BRICS में भारत का सफर अब केवल अधिक आवाज की मांग तक सीमित नहीं है, बल्कि देश अपने अनुभवों और सफल मॉडलों के साथ वैश्विक मंच पर पहुंच रहा है।
उन्होंने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI), UPI, वित्तीय समावेशन, स्टार्टअप, नवीकरणीय ऊर्जा, सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती में भारत के अनुभवों को रेखांकित किया। उनका कहना है कि इन मॉडलों से अन्य BRICS देश सीख सकते हैं, हालांकि उन्हें अपनी जरूरतों के अनुसार ढालना जरूरी होगा।
स्थानीय मुद्राओं में BRICS देशों के बीच बढ़ते व्यापार पर भी शास्त्री ने भुगतान प्रणालियों के बेहतर संपर्क और आपसी संचालन क्षमता को महत्वपूर्ण बताया। हालांकि उन्होंने मुद्रा परिवर्तनीयता, लेनदेन लागत, नियामकीय स्पष्टता और वित्तीय स्थिरता जैसे मुद्दों को ध्यान में रखते हुए इस प्रक्रिया को धीरे-धीरे आगे बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।
भारत की बदलती BRICS यात्रा अब केवल वैश्विक संस्थानों में सुधार की मांग करने तक सीमित नहीं रह गई है। न्यू डेवलपमेंट बैंक, वैक्सीन कूटनीति, डिजिटल सार्वजनिक ढांचे और मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं के जरिए भारत यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि उभरती अर्थव्यवस्थाएं न केवल वैश्विक व्यवस्था में अपनी जगह मांग सकती हैं, बल्कि अपने स्तर पर प्रभावी समाधान भी तैयार कर सकती हैं।


