- चीन में AI का तेजी से बढ़ता इस्तेमाल
- सरकार पर भरोसा, जोखिमों को लेकर अलग नजरिया
- आर्थिक विकास से जुड़ी AI की उम्मीदें
हांगकांग/बीजिंग: अमेरिका की तुलना में चीन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से मानवता के अस्तित्व पर मंडराने वाले खतरे को लेकर सार्वजनिक चिंता अपेक्षाकृत कम दिखाई देती है। चीन में सरकारी सेवाओं से लेकर शिक्षा, होटल और डिलीवरी तक AI और रोबोट का तेजी से इस्तेमाल हो रहा है।
मॉर्गन स्टेनली के एक सर्वे के मुताबिक, चीन में 80% लोगों ने कहा कि वे कम से कम सप्ताह में एक बार AI का इस्तेमाल करते हैं, जबकि अमेरिका में यह आंकड़ा 54% रहा। वहीं, इप्सोस के सर्वे में 83% चीनी लोगों ने AI आधारित उत्पादों और सेवाओं को उत्साहजनक माना, जबकि अमेरिका में यह आंकड़ा 33% था।
विश्लेषकों के अनुसार, दोनों देशों में AI को लेकर सोच में अंतर के पीछे तकनीक के इस्तेमाल, सार्वजनिक बहस और सरकारों पर भरोसे का स्तर अहम कारण हो सकते हैं। चीन में लोगों का एक वर्ग मानता है कि यदि AI से गंभीर जोखिम पैदा होते हैं तो सरकार हस्तक्षेप कर सकती है।
चीन में AI को लेकर चेतावनियां जरूर दी जाती हैं, लेकिन उनका फोकस मानव विलुप्ति की तुलना में साइबर हमले, गलत सूचना, सामाजिक अस्थिरता और राजनीतिक सुरक्षा जैसे जोखिमों पर अधिक रहता है। चीनी खुफिया प्रमुख चेन यिक्सिन ने भी AI को रणनीतिक उद्योग बताते हुए इसके संभावित खतरों को रेखांकित किया है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, चीन की कंपनियां AI को तेजी से व्यावसायिक सेवाओं में शामिल कर रही हैं। मुफ्त चैटबॉट, स्मार्ट ऐप और औद्योगिक ऑटोमेशन ने आम लोगों को AI के व्यावहारिक लाभों से सीधे जोड़ा है। चीन की तकनीकी प्रगति को कई लोग देश की आर्थिक और वैश्विक उन्नति से भी जोड़कर देखते हैं।
इसके विपरीत, अमेरिका में बड़ी टेक कंपनियों की शक्ति, सरकारी निगरानी और AI के तेजी से विकास को लेकर अधिक सार्वजनिक बहस देखने को मिलती है। चीन में सरकार की मजबूत नियामक भूमिका और तकनीकी प्रगति को राष्ट्रीय गौरव से जोड़ने की प्रवृत्ति AI के प्रति अपेक्षाकृत सकारात्मक रवैये को बढ़ावा देती है।


