- कार्टर ने खोजा सोने से भरा मक़बरा
- तूतनख़ामेन से जुड़ा ‘ममी का श्राप’
- तीन हजार साल बाद गूंजी तुरही
काहिरा। मिस्र के युवा फ़ैरो तूतनख़ामेन का मक़बरा दुनिया की सबसे चर्चित पुरातात्विक खोजों में शामिल है। ब्रिटिश पुरातत्वविद् हावर्ड कार्टर ने नवंबर 1922 में किंग्स वैली में इस मक़बरे का प्रवेश द्वार खोजा था। अंदर सोने से सजी मूर्तियां, आभूषण और शाही वस्तुओं का विशाल भंडार मिला, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान प्राचीन मिस्र की ओर खींचा।
मक़बरे के भीतर पहुंचने और तूतनख़ामेन के पत्थर के सरकोफ़ेगस तक पहुंचने में कार्टर की टीम को करीब 15 महीने लगे। युवा फ़ैरो की मृत्यु लगभग 17 वर्ष की आयु में हुई थी। उनकी मृत्यु का कारण आज भी निश्चित नहीं है।
मक़बरे की खोज के बाद तूतनख़ामेन को लेकर ‘ममी के श्राप’ जैसी कहानियां भी तेजी से लोकप्रिय हुईं। लॉर्ड कार्नरवॉन की मृत्यु के बाद इन अफ़वाहों को और बल मिला, हालांकि श्राप के दावे का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
1939 में तूतनख़ामेन की कब्र से मिली प्राचीन तुरहियों की ध्वनि बीबीसी रेडियो पर प्रसारित की गई। करीब 3,000 वर्षों की खामोशी के बाद इन वाद्ययंत्रों की आवाज़ दुनिया भर में सुनी गई।
आज भी तूतनख़ामेन की वस्तुओं पर शोध जारी है। 2025 में उनकी कब्र की पूरी सामग्री को पहली बार ग्रैंड इजिप्शियन म्यूज़ियम में एक साथ प्रदर्शित किया गया। उनका प्रसिद्ध स्वर्ण मुखौटा संग्रहालय में है, जबकि उनकी ममी अब भी किंग्स वैली में सुरक्षित है।


