- बर्खास्तगी आदेश हुआ रद्द
- गुप्त जांच पर्याप्त नहीं
- नए सिरे से कार्रवाई संभव
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर बैंक के अधिकारी पमपोरी की बर्खास्तगी रद्द कर दी है। अधिकारी पर कथित रूप से भारत विरोधी सोशल मीडिया अभियान में शामिल होने का आरोप था।
अधिकारियों ने आरोप लगाया कि पमपोरी #TortureKashmir अभियान से जुड़े थे, जिसका उद्देश्य भारतीय राज्य के खिलाफ कथित तौर पर गलत धारणा बनाना था। बैंक ने कार्रवाई के लिए गोपनीय CID रिपोर्ट, गुप्त जांच और सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला दिया।
कोर्ट ने कहा कि यह सामग्री क्लॉज 12.29 के तहत “जांच” की आवश्यकताओं को पूरा नहीं करती। अदालत के अनुसार, जांच में सबूत जुटाने और संबंधित लोगों के बयान दर्ज करने जैसी प्रक्रिया जरूरी है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि FIR दर्ज करना अनिवार्य नहीं है, लेकिन केवल गुप्त सत्यापन को जांच का विकल्प नहीं माना जा सकता।
अदालत ने बैंक के इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि क्लॉज 12.29 संविधान के अनुच्छेद 311(2)(c) के समान है। कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रपति या राज्यपाल की संवैधानिक शक्तियों की तुलना बैंक के MD और CEO के अधिकारों से नहीं की जा सकती।
पमपोरी को बर्खास्तगी से पहले वाले पद पर बहाल करने का आदेश दिया गया है। हालांकि, यह फैसला उन्हें पूरी तरह निर्दोष घोषित नहीं करता। बैंक नियमों का पालन करते हुए नए सिरे से कार्रवाई या नियमित विभागीय जांच कर सकता है।


