नई दिल्ली। चीनी के बाद अब प्याज की बढ़ती कीमतों ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। देश के कई हिस्सों में पिछले एक महीने के दौरान प्याज की कीमतों में तेज उछाल आया है। शनिवार को प्याज की औसत कीमत करीब 42 रुपये प्रति किलोग्राम रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में 45 प्रतिशत और पिछले महीने से 19 प्रतिशत अधिक है।
उपभोक्ता मामलों के विभाग के अनुसार दिल्ली में प्याज का खुदरा भाव 65 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है, जबकि पिछले वर्ष यह 35 रुपये था। चेन्नई में भी प्याज 58 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहा है। नासिक की प्रमुख प्याज मंडी में पिछले एक महीने में कीमत करीब 76 प्रतिशत बढ़ी है।
जानकारों के अनुसार मानसून की अनिश्चितता, बुवाई में देरी, कमजोर आवक और खरीफ प्याज के उत्पादन में संभावित गिरावट इसके प्रमुख कारण हैं। अगस्त-सितंबर में रबी फसल का भंडार घटने और खरीफ फसल की आवक में समय लगने से भी कीमतों पर दबाव बढ़ता है। जमाखोरी ने स्थिति को और गंभीर किया है।
सरकार चलाएगी ‘कांदा एक्सप्रेस’
बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बफर स्टॉक का प्याज बाजार में उतारने का निर्णय लिया है। आज से नासिक से दिल्ली, चेन्नई, कोच्चि और गुवाहाटी के लिए ‘कांदा एक्सप्रेस’ के माध्यम से प्याज भेजा जाएगा। सरकार का उद्देश्य इन शहरों में उपभोक्ताओं को अपेक्षाकृत कम कीमत पर प्याज उपलब्ध कराना है।
नासिक मंडी में प्याज का भाव करीब एक महीने पहले 2,050 रुपये प्रति क्विंटल था, जो अब 3,600 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर पहुंच गया है। सरकार और किसानों के पास आने वाले महीनों की मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त भंडार होने का दावा किया गया है।


