सीतामढ़ी। बिहार में दलितों एवं महादलितों के खिलाफ बढ़ते अत्याचारों ने राज्य सरकार और कानून-व्यवस्था की कार्यक्षमता को सवालों के घेरे में ला दिया है। अनुसूचित जाति/जनजाति की सुरक्षा के लिए बने कानूनों का पालन न होने से यह समुदाय बार-बार उत्पीड़न का शिकार हो रहा है।
हाल ही में मुजफ्फरपुर जिले के कुढ़नी में एक नाबालिग महादलित बच्ची से दुष्कर्म और हत्या की घटना से अभी लोगों का गुस्सा थमा भी नहीं था कि सीतामढ़ी जिले के रुनी सैदपुर थाना क्षेत्र के इब्राहिमपुर गांव में महादलित रामनाथ बैठा की 13-14 मई की रात हत्या कर दी गई और शव को मकई के खेत में छिपा दिया गया। यह मामला रुनी सैदपुर थाना कांड संख्या 187/2025 में दर्ज किया गया है।
वहीं सीतामढ़ी जिले के साहियारा थाना क्षेत्र में कुछ दिन पूर्व एक नाबालिग महादलित लड़की का अपहरण किया गया था। इसके ठीक बाद औरंगाबाद जिले के हसपुरा थाना क्षेत्र के पौथू ग्राम इटावा झिगुरी में महादलित समुदाय से ताल्लुक रखने वाले दुकानदार रामनरेश रजक को गांव के दबंगों ने जातिसूचक गालियां देते हुए लाठी-डंडों से बेरहमी से पीटकर जख्मी कर दिया। जब ग्रामीण इकट्ठा होने लगे तो आरोपी फरार हो गए। गंभीर हालत में रामनरेश रजक को औरंगाबाद सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां से चिकित्सकों ने उन्हें पटना के पीएमसीएच रेफर कर दिया।
घटना की सूचना मिलने के बाद धोबी समाज के प्रतिनिधि सुधीर रजक, मुजफ्फरपुर जिला अध्यक्ष कपल रजक और धोबी समाज की कांग्रेस नेता साधना रजक अस्पताल पहुंचे और घायल रामनरेश रजक का हालचाल लिया। इसके बाद उन्होंने संबंधित थाने और जिले के पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और त्वरित गिरफ्तारी की मांग की।
लगातार हो रहे दलितों और महादलितों के खिलाफ आपराधिक घटनाक्रम यह साबित करने लगे हैं कि प्रशासन और कानून व्यवस्था में समुचित सख्ती और जवाबदेही का अभाव है, जिससे वंचित और शोषित समुदाय भय और असुरक्षा में जीवन व्यतीत करने को मजबूर है।