- 20 किलोमीटर से लंबे प्रोजेक्ट्स पर लागू
- रियल-टाइम डेटा से होगी गुणवत्ता निगरानी
- मशीनों से घटेगी मानवीय गलती की गुंजाइश
नई दिल्ली। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने 20 किलोमीटर से अधिक लंबे और 500 करोड़ रुपये से ज्यादा लागत वाले सभी हाईवे प्रोजेक्ट्स में ऑटोमेटेड और इंटेलिजेंट मशीन-एडेड कंस्ट्रक्शन (AI-MC) को अनिवार्य कर दिया है। इसका उद्देश्य सड़क निर्माण की गुणवत्ता, टिकाऊपन और पारदर्शिता को बेहतर बनाना है।
AI-MC तकनीक में ग्रेडर, पेवर, कॉम्पैक्टर और डोजर जैसी निर्माण मशीनों में कंप्यूटर और सेंसर लगाए जाते हैं। ये मशीनें निर्माण कार्य के दौरान वास्तविक समय में डेटा जुटाती हैं, जिससे काम की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों की निगरानी की जा सकेगी।
नई व्यवस्था के तहत एम्बैंकमेंट, सबग्रेड और ग्रैनुलर सब-बेस (GSB) जैसी सड़क की प्रमुख परतों के निर्माण में भी AI-MC का इस्तेमाल किया जाएगा। निर्माण के दौरान जुटाया गया रियल-टाइम डेटा NHAI अधिकारियों के साथ साझा करना अनिवार्य होगा।
NHAI का मानना है कि इससे मानवीय गलतियां कम होंगी, निर्माण प्रक्रिया में एकरूपता आएगी और सड़क निर्माण के प्रत्येक चरण का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा। अधिकारियों के अनुसार, तकनीक से ठेकेदारों और उप-ठेकेदारों की कार्यप्रणाली पर भी अधिक प्रभावी निगरानी संभव होगी।


