√ अफगान आतंकी संगठन TTP से जुड़े मौलाना ओसामा उमर की गिरफ्तारी।
√ भारत में फैले आतंक नेटवर्क का परत-दर-परत खुलासा।
जयपुर, 9 नवम्बर।
भारत की खुफिया एजेंसियों ने एक बार फिर देश को संभावित बड़े आतंकी खतरे से बचा लिया है। राजस्थान एटीएस ने बुधवार को राज्य के सांचौर इलाके से एक ऐसे मौलाना को गिरफ्तार किया है, जिसके आतंकवादी संगठनों से संबंधों ने पूरे सुरक्षा तंत्र को हिला कर रख दिया है। गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान मौलाना ओसामा उमर के रूप में हुई है, जो पिछले चार वर्षों से अफगानिस्तान स्थित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के शीर्ष कमांडर के संपर्क में था।
एटीएस सूत्रों के अनुसार, ओसामा उमर भारत में आतंकी मॉड्यूल तैयार करने और संवेदनशील क्षेत्रों में संगठनात्मक विस्तार करने में जुटा था। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि वह दुबई के रास्ते अफगानिस्तान भागने की योजना बना रहा था, जिससे उसके ऊपर गहराती शंका की पुष्टि होती है।
चार और आतंकी साथी गिरफ्तार: राजस्थान एटीएस की गहन पूछताछ में ओसामा के नेटवर्क से जुड़े चार और संदिग्धों को भी गिरफ्तार किया गया है। इनकी पहचान मोहम्मद मसूद, अयूब, जुनैद और बसीर के रूप में हुई है।
ये सभी व्यक्ति भारत के अलग-अलग राज्यों में सक्रिय होकर देश के अंदर आतंकी गतिविधियों को संचालित करने की साजिश रच रहे थे।
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि इनका संपर्क पाकिस्तान और बांग्लादेश में सक्रिय आतंकी हैंडलरों से था। फिलहाल, एटीएस और एनआईए की संयुक्त टीमें इस नेटवर्क के तकनीकी और आर्थिक स्रोतों की गहराई से पड़ताल कर रही हैं।
UP ATS की गिरफ्तारी से जुड़ा कनेक्शन: यह मामला तब और गंभीर हो गया जब जांच में पता चला कि राजस्थान में गिरफ्तार ओसामा का संबंध हाल ही में उत्तर प्रदेश एटीएस द्वारा सहारनपुर से गिरफ्तार आतंकी बिलाल से भी जुड़ा हुआ है।
बिलाल अलकायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) से जुड़ा हुआ था और उसके मोबाइल से पाकिस्तान में सक्रिय हैंडलरों के 4000 से अधिक संपर्क नंबर मिले थे।
बिलाल के रिमांड के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ सामने आई थीं, जिनसे संकेत मिले कि भारत में एक संयुक्त आतंकी नेटवर्क पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के माध्यम से सक्रिय है, जो देश के विभिन्न हिस्सों में सामूहिक हमले की तैयारी कर रहा था।
ओसामा के विदेशी संपर्क और राजनीतिक पृष्ठभूमि: एटीएस के अनुसार, ओसामा का संबंध हाफिज सईद के करीबी आतंकी सैफुल्लाह से था, जो फिलहाल बांग्लादेश में सक्रिय है।
चौंकाने वाली बात यह है कि ओसामा एक प्रतिष्ठित पारिवारिक पृष्ठभूमि से आता है — उसका नाना जमाते-हिंद संगठन में नायब पद पर हैं और परनाना बाड़मेर से विधायक रह चुके हैं।
इन तथ्यों ने सुरक्षा एजेंसियों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि कट्टरपंथी संगठनों ने किस प्रकार शिक्षित और प्रभावशाली पारिवारिक पृष्ठभूमि वाले युवाओं को भी अपने जाल में फंसा लिया है।
बांग्लादेश में बढ़ती हलचल से बढ़ी चिंता: ओसामा और सैफुल्लाह के बीच संबंधों का खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब बांग्लादेश में पाकिस्तानी सैन्य और खुफिया हलचलें तेजी से बढ़ रही हैं।
जानकारी के मुताबिक, अक्टूबर में पाकिस्तानी सेना के ज्वाइंट स्टाफ शमशाद मिर्जा ने ढाका का दौरा किया था और अब 8 नवम्बर को पाकिस्तान के नेवी चीफ एडमिरल नवीद अशरफ चौधरी बांग्लादेश पहुंचे हैं।
सूत्र बताते हैं कि पाकिस्तानी युद्धपोत भी ढाका तट पर पहुंच चुका है, जो भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पाकिस्तान, अमेरिका और बांग्लादेश के बीच किसी गुप्त रणनीतिक सौदे या आतंकी सहयोग की तैयारी का संकेत हो सकता है।
देश में बढ़ती आतंकी गतिविधियाँ और अलर्ट जारी: पिछले कुछ हफ्तों में देश के विभिन्न हिस्सों — सहारनपुर, कोलकाता, राजस्थान और केरल — से आतंकियों और संदिग्धों की लगातार गिरफ्तारियाँ इस बात का प्रमाण हैं कि आतंकी संगठन भारत में फिर से सक्रिय होने की कोशिश में हैं।
कोलकाता में हाल ही में भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद की गई थी, जिसे बम निरोधक दस्ते ने निष्क्रिय किया। यह भी माना जा रहा है कि इन सभी घटनाओं के बीच एक संगठित आतंक नेटवर्क सक्रिय है, जो भारत को अस्थिर करने की साजिश में लगा है।
सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता से टला बड़ा खतरा: भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और समय पर की गई कार्रवाई से देश इस बार एक बड़े आतंकी हमले से बच गया है।
राजस्थान एटीएस, यूपी एटीएस और केंद्रीय एजेंसियों के बीच हुई सूचना-साझेदारी और त्वरित एक्शन ने साबित किया है कि भारत की आंतरिक सुरक्षा तंत्र पूरी तरह सतर्क है।
फिर भी, एजेंसियाँ मान रही हैं कि यह केवल आतंकी साजिश की शुरुआत थी और अभी कई परतें खुलनी बाकी हैं। ओसामा उमर और उसके साथियों से बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, विदेशी लेनदेन के दस्तावेज और पासपोर्ट की जांच जारी है।
नागरिकों से सतर्क रहने की अपील: एटीएस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना पुलिस या स्थानीय प्रशासन को दें।
देश की सुरक्षा एजेंसियाँ पूरी तरह सतर्क हैं, परंतु आतंकियों की रणनीति और तकनीकी संसाधनों को देखते हुए जनसहयोग और सतर्कता अत्यंत आवश्यक है।
भारत की खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों की समय पर कार्रवाई ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि देश के खिलाफ किसी भी आतंकी षड्यंत्र को यहां की चौकस निगाहों से बचना संभव नहीं।
मगर सवाल यह है कि क्या इस बार आतंक के बीज को जड़ से उखाड़ा जा सकेगा या यह नेटवर्क फिर किसी नए रूप में सिर उठाएगा?