निभाई अहम भूमिका, 25 जून 2025 | वाशिंगटन/नीदरलैंड्स | विशेष संवाददाता
ईरान और इज़रायल के बीच 12 दिन चले संघर्ष के युद्धविराम में अमेरिकी कूटनीति की अहम भूमिका रही है — यह दावा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किया है। नीदरलैंड्स में चल रहे नेटो शिखर सम्मेलन में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, “यदि हमने हस्तक्षेप न किया होता तो यह जंग पूरे मध्य-पूर्व को जला देती।”
ट्रंप ने आगे कहा कि अमेरिका ने पर्दे के पीछे नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष संवाद के ज़रिये दोनों पक्षों को सहमति तक पहुँचाया। उन्होंने यह संकेत भी दिया कि अमेरिका अब ‘दूर से हस्तक्षेप’ करने की नीति छोड़कर ‘सक्रिय समाधान’ अपनाने की राह पर है।
ईरान के परमाणु ठिकानों पर हुए अमेरिकी बी-2 बमवर्षक हमले के सवाल पर ट्रंप ने सीधी प्रतिक्रिया तो नहीं दी, मगर यह ज़रूर दोहराया कि “अगर अमेरिका या उसके मित्र देशों की सुरक्षा को खतरा हुआ तो जवाब ज़रूर दिया जाएगा।”
पूर्व राष्ट्रपति ने यह भी उम्मीद जताई कि जल्द ही अमेरिका, इज़रायल और अन्य क्षेत्रीय पक्षों के बीच त्रिपक्षीय शांति वार्ता शुरू हो सकेगी। उन्होंने ईरान और इज़रायल दोनों से संयम और पारदर्शिता बरतने का आग्रह किया।
ट्रंप का यह बयान यह इंगित करता है कि अमेरिका मध्य-पूर्व में अपनी केंद्रीय भूमिका निभाने के लिए तत्पर है। हालांकि ईरान की ओर से अब तक कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं आई है, मगर युद्धविराम के बाद यह कूटनीतिक हलचल भविष्य में एक नए संवाद और समीकरण का आधार बन सकती है।
जहाँ अंतरराष्ट्रीय रिश्तों को मिले संवाद और सहमति का मंच।


