- सेमीकंडक्टर नियम होंगे सरल
- ऑटो उद्योग को राहत
- 50 अरब डॉलर निवेश
टोक्यो। भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाने का संकेत दिया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि सेमीकंडक्टर उपकरण और ऑटोमोबाइल कलपुर्जे बनाने वाली कंपनियों की नियामकीय दिक्कतें दूर की जाएंगी। अगले दो महीनों में नियमों में बदलाव किए जाने की संभावना है।
गोयल ने कहा कि भारत में विनिर्माण शुरू करने की इच्छुक दो बड़ी वैश्विक कंपनियों की चिंताओं पर सरकार ने गंभीरता से विचार किया है। भारतीय मानक ब्यूरो के नियमों और मंजूरी प्रक्रिया को सरल बनाने पर भी काम किया जा रहा है। इससे कंपनियों को कारोबार शुरू करने में होने वाली देरी कम हो सकती है।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र पर जोर
केंद्र सरकार ने हाल ही में ‘सेमीकॉन 2.0’ मिशन को मंजूरी दी है। इसके तहत सेमीकंडक्टर डिजाइन, निर्माण और इससे जुड़े पूरे औद्योगिक तंत्र को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार अगले डेढ़ वर्ष में करीब 50 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित करने की योजना बना रही है।
गोयल ने स्पष्ट किया कि भारत केवल वैकल्पिक विनिर्माण केंद्र नहीं बनना चाहता। सरकार का लक्ष्य वैश्विक कंपनियों के लिए मजबूत और दीर्घकालिक उत्पादन केंद्र तैयार करना है। सरल नियम, तेज मंजूरी और मजबूत घरेलू आपूर्ति शृंखला इस लक्ष्य में अहम भूमिका निभा सकती है।
निवेश और रोजगार बढ़ाने की तैयारी
नियमों में प्रस्तावित बदलावों से सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल कलपुर्जा उद्योग में नए निवेश को गति मिलने की उम्मीद है। इससे देश में उत्पादन बढ़ने के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। घरेलू आपूर्ति शृंखला मजबूत होने से उद्योग को भी फायदा मिलेगा।
गोयल के अनुसार, सेमीकंडक्टर क्षेत्र में विकास एक दीर्घकालिक प्रक्रिया है। मौजूदा पहल के बाद सरकार आगे ‘सेमीकॉन 3.0’ की दिशा में भी बढ़ेगी। इसका उद्देश्य भारत को चिप निर्माण और उच्च तकनीकी विनिर्माण के वैश्विक मानचित्र पर मजबूत स्थान दिलाना है।

