पांच किलोमीटर लंबी अगवानी में उमड़ा श्रद्धा का सागर।
हिन्द सागर प्रलोका, बेंगलुरु संवाददाता विपिन कुमार जैन |
बेंगलुरु, 19 जुलाई। राजधानी बेंगलुरु की पावन धरा रविवार को धर्म, भक्ति, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना से आलोकित हो उठी। आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य, निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीर सागर महाराज ससंघ का नगर में भव्य मंगल प्रवेश श्रद्धा, अनुशासन और भक्ति का अनुपम उदाहरण बन गया। महादेवपुरा गौशाला से श्री ज्ञानोदय दिगंबर जैन मंदिर, तुबरहल्ली तक निकली लगभग पांच किलोमीटर लंबी मंगल अगवानी में हजारों श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता कर अपने आराध्य संत के प्रति अटूट आस्था का परिचय दिया।
सुबह से ही श्रद्धालुओं का जनसैलाब मार्ग के दोनों ओर उमड़ पड़ा। महिलाएं मंगल कलश एवं आरती की थाल लिए संत स्वागत के लिए खड़ी थीं, वहीं युवाओं में सेवा और अनुशासन का अद्भुत उत्साह देखने को मिला। पूरे मार्ग पर श्रद्धालुओं द्वारा बनाई गई आकर्षक रंगोलियां, पुष्पवर्षा, भक्ति गीतों की मधुर स्वर लहरियां तथा “वीर सागर महाराज की जय” के गगनभेदी जयघोष वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना रहे थे। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूरा बेंगलुरु आध्यात्मिक ऊर्जा और धार्मिक उल्लास से सराबोर हो उठा हो।
भव्य शोभायात्रा का स्वरूप अत्यंत आकर्षक और दिव्य था। शोभायात्रा में 11 हाथी, 31 अश्व, 21 सुसज्जित बग्गियां, ढोल-ताशा एवं बैंड दल, पारंपरिक सांस्कृतिक झांकियां तथा सैकड़ों छोटे-बड़े जैन ध्वज श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने रहे। वहीं 108 फीट लंबी तीन विशाल धर्म ध्वजाएं पूरे मार्ग में अहिंसा, संयम और भारतीय संस्कृति का संदेश देती हुई आगे बढ़ रही थीं। श्रद्धा और वैभव का यह अद्भुत समन्वय प्रत्येक श्रद्धालु के मन को भावविभोर कर रहा था।
आयोजन की विशेष पहचान समाज की युवा शक्ति और मातृशक्ति की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही। पारंपरिक कर्नाटक वेशभूषा में सुसज्जित युवाओं ने अनुशासन और सेवा भावना का परिचय दिया, जबकि विभिन्न रंगों की पारंपरिक साड़ियों में सुसज्जित महिला मंडलों ने मंगल गीतों एवं आरती के माध्यम से वातावरण को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया। श्रद्धालु अपने हाथों में कलश, चंवर एवं अष्टमंगल धारण किए चल रहे थे। केरल की प्रसिद्ध कथकली सहित अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने शोभायात्रा को अखिल भारतीय सांस्कृतिक स्वरूप प्रदान किया। 32 चंवरधारी सेवक तथा 11 निष्कलंक देव शोभायात्रा की गरिमा और दिव्यता में चार चांद लगा रहे थे।
इतने विशाल जनसमूह के बावजूद पूरे आयोजन में अनुशासन और उत्कृष्ट व्यवस्थाओं का अनुपम उदाहरण देखने को मिला। स्वयंसेवकों, वीर सेवा दल तथा पुलिस प्रशासन ने पूरे मार्ग में व्यवस्था को सुचारु बनाए रखा। व्हाइटफ़ील्ड के एसीपी श्री सुधाकर ने स्वयं व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया तथा यातायात संचालन को सुव्यवस्थित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। श्रद्धालुओं ने भी संयम और अनुशासन का परिचय देते हुए आयोजन को पूर्ण गरिमा प्रदान की।
इस ऐतिहासिक अवसर पर बेंगलुरु सेंट्रल के सांसद श्री पी. सी. मोहन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने पूज्य मुनि श्री के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया तथा जैन समाज की सेवा, संस्कार और राष्ट्र निर्माण में भूमिका की सराहना की। इस अवसर पर श्री महेश काला, श्री अनिल सेठी, श्री आदिश्वर जी, श्री आदिनाथ नरडे, श्री मनोज वेल सहित समाज के अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का प्रभावी एवं गरिमामय संचालन जबलपुर से पधारे श्री सुधांशु जैन ने किया।
श्री ज्ञानोदय दिगंबर जैन मंदिर पहुंचने पर पूज्य मुनि श्री ने भगवान संभवनाथ के दर्शन एवं वंदन कर अपने मंगल प्रवास का शुभारंभ किया। इसके पश्चात संघ का विशाल पंडाल में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। गोम्मटेश बाहुबली की थीम पर सुसज्जित विशाल मंच तथा श्रद्धालुओं से खचाखच भरा पंडाल आयोजन की दिव्यता और समाज की अटूट श्रद्धा का साक्षी बना। स्वागत समारोह में आयोजन समिति के अध्यक्ष श्री राकेश बरया ने समस्त समाज, स्वयंसेवकों, वीर सेवा दल, महिला मंडलों तथा सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संतों का आगमन किसी भी नगर के लिए आध्यात्मिक सौभाग्य का विषय होता है।
अपने मंगल सान्निध्य में पूज्य मुनि श्री 108 वीर सागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य आत्मशुद्धि, आत्मसंयम और आत्मकल्याण है। उन्होंने अहिंसा, सदाचार, त्याग और संयम के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हुए समाज से धर्म और संस्कारों को जीवन का आधार बनाने का आह्वान किया। उनके प्रेरणादायी संदेश को सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और पूरे पंडाल में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो गया।
इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने पूज्य मुनि श्री के सान्निध्य में आयोजित होने वाले प्रवचनों, स्वाध्याय, पूजन एवं विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों में नियमित सहभागिता का संकल्प लिया। समाज के वरिष्ठजनों का मानना है कि मुनि श्री का यह मंगल प्रवास बेंगलुरु में आध्यात्मिक चेतना को नई दिशा प्रदान करेगा तथा युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और संयममय जीवन से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
श्रद्धा, सेवा, अनुशासन और आध्यात्मिक चेतना से परिपूर्ण यह ऐतिहासिक मंगल अगवानी केवल एक धार्मिक शोभायात्रा नहीं, बल्कि जैन समाज की एकता, संत परंपरा के प्रति अटूट विश्वास और भारतीय संस्कृति के गौरव का विराट प्रदर्शन थी। हजारों श्रद्धालुओं की भावपूर्ण उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि संतों का सान्निध्य समाज को केवल आध्यात्मिक दिशा ही नहीं देता, बल्कि सद्भाव, सेवा और संस्कारों से भी जोड़ता है। निस्संदेह, बेंगलुरु में मुनि श्री 108 वीर सागर महाराज ससंघ का यह भव्य मंगल प्रवेश नगर के धार्मिक एवं सामाजिक इतिहास में एक अविस्मरणीय, प्रेरणादायी और स्वर्णिम अध्याय के रूप में लंबे समय तक स्मरण किया जाएगा।