मानव सेवा को सर्वोच्च धर्म मानने की भारतीय परंपरा को साकार करते हुए मारवाड़ी युवा मंच, बेंगलुरु द्वारा आज एक प्रेरणादायक एवं अनुकरणीय पहल की गई। मंच ने नारायणा ब्लड बैंक के सहयोग से कृपानिधि डिग्री कॉलेज, वरथुर होबली में एक भव्य रक्तदान शिविर का आयोजन किया, जो अत्यंत सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
इस सेवा-यज्ञ में युवाओं और विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और अपने भीतर निहित करुणा, संवेदना एवं सामाजिक उत्तरदायित्व का परिचय दिया। कुल 165 यूनिट रक्त संग्रहित कर इस आयोजन ने न केवल जीवनदान का मार्ग प्रशस्त किया, बल्कि समाज में जागरूकता का दीप भी प्रज्वलित किया।
रक्तदान को शास्त्रों में “महादान” कहा गया है, क्योंकि यह सीधे किसी के प्राणों की रक्षा से जुड़ा होता है। जब एक व्यक्ति स्वेच्छा से अपना रक्त दान करता है, तो वह केवल शरीर का अंश नहीं देता, बल्कि किसी अज्ञात जीवन में आशा, विश्वास और पुनर्जन्म का संचार करता है। आज के यांत्रिक और भागदौड़ भरे जीवन में ऐसे सेवा कार्य आध्यात्मिक संतुलन और मानवीय संवेदनाओं को पुनर्जीवित करने का माध्यम बनते हैं।
कार्यक्रम के दौरान युवाओं का उत्साह विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। उनकी सक्रिय भागीदारी यह संकेत देती है कि नई पीढ़ी केवल आधुनिकता की ओर ही नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्वों और सेवा के पथ पर भी दृढ़तापूर्वक अग्रसर है। यह शिविर एक ऐसे मंच के रूप में उभरा, जहाँ सेवा और संस्कार का अद्भुत संगम देखने को मिला।
इस अवसर पर मंच के अध्यक्ष श्री जय प्रकाश अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान समय में बेंगलुरु के कई अस्पतालों में रक्त की गंभीर कमी बनी हुई है। ऐसे में इस प्रकार के रक्तदान शिविर न केवल आवश्यक हैं, बल्कि समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारी का प्रतीक भी हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि मंच भविष्य में भी इसी प्रकार के सेवा कार्यों को निरंतर जारी रखेगा।
उन्होंने इस सफल आयोजन के लिए संयोजक श्री शुभम लोहिया के समर्पण और नेतृत्व की सराहना की तथा समिति सदस्य श्री सौरभ मित्तल के योगदान को भी विशेष रूप से रेखांकित किया।
मंच के सचिव सीए विनोद गर्ग ने इस रक्तदान शिविर (वर्ष 2026–27 का प्रथम शिविर) को सफल बनाने हेतु सभी समिति सदस्यों, कृपानिधि डिग्री कॉलेज तथा नारायणा हेल्थ ग्रुप के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयास ही किसी भी सेवा कार्य की सफलता का आधार होता है।
इस आयोजन में कॉलेज की प्राचार्य डॉ. बदरुन्निसा एस. एवं संस्थान के प्रबंधन और स्टाफ का सहयोग भी अत्यंत सराहनीय रहा, जिनके सक्रिय सहयोग से यह सेवा कार्य सुचारु रूप से संपन्न हो सका।
अंततः, मंच ने सभी रक्तदाताओं, स्वयंसेवकों एवं सहयोगियों के प्रति कृतज्ञता प्रकट की। यह शिविर केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि मानवता, सेवा और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया।
आज जब समाज अनेक चुनौतियों से गुजर रहा है, तब इस प्रकार के प्रयास यह संदेश देते हैं कि यदि सेवा का भाव जीवित है, तो आशा भी जीवित है। वास्तव में, रक्तदान केवल एक सामाजिक कर्तव्य नहीं, बल्कि आत्मा को ऊँचा उठाने वाली एक पवित्र साधना है—जहाँ देने वाला भी धन्य होता है और पाने वाला भी जीवन से भर उठता है।