बेंगलुरु, 31 मार्च (मंगलवार): जब शब्द मौन हो जाते हैं, तब चित्र बोलते हैं—और जब चित्रों में महापुरुषों का जीवन उतर आता है, तो वे केवल दृश्य नहीं, बल्कि आत्मा को स्पर्श करने वाले संदेश बन जाते हैं। इसी भाव के साथ भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक के पावन अवसर पर फ्रीडम पार्क में कल्याण मित्र परिवार द्वारा एक भव्य एवं प्रेरणादायी चित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।
इस प्रदर्शनी में भगवान महावीर स्वामी के जीवन से जुड़ी घटनाओं, उनके उपदेशों और अहिंसा, सत्य एवं करुणा के संदेशों को सुंदर एवं कलात्मक पेंटिंग्स के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। प्रत्येक चित्र मानो दर्शकों को आत्मचिंतन और सद्गुणों की ओर अग्रसर होने का निमंत्रण दे रहा था।
कार्यक्रम का उद्घाटन संगठन के वरिष्ठ सदस्य जीतेश भंडारी ने किया। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि जिस प्रकार शब्द मन को प्रभावित करते हैं, उसी प्रकार चित्र भी व्यक्ति के मनोभावों पर गहरा प्रभाव डालते हैं। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज के सोशल मीडिया युग में हिंसा, अश्लीलता और नकारात्मकता से भरे दृश्य लोगों के विचारों और व्यवहार को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे समय में महापुरुषों के जीवन को चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत करना समाज को सकारात्मक दिशा देने का अत्यंत प्रभावी माध्यम है।
संगठन के मीडिया प्रभारी हितेश कटारिया ने बताया कि यह प्रदर्शनी बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी के लिए भगवान महावीर के जीवन को समझने का सरल और प्रभावशाली माध्यम बन रही है। उन्होंने कहा कि चित्रों के माध्यम से जटिल आध्यात्मिक संदेश भी सहजता से हृदय तक पहुँचते हैं।
प्रदर्शनी देखने आए युवाओं और नागरिकों ने भी इस प्रयास की सराहना की। एक दर्शक आशीष कटारिया ने कहा कि इस प्रदर्शनी के माध्यम से भगवान महावीर के जीवन की घटनाओं को समझना अत्यंत रोचक और ज्ञानवर्धक रहा। वहीं सीए दीप्ति गादिया ने कहा कि “एक चित्र हजार शब्दों के समान होता है”—यह प्रदर्शनी इस कहावत को पूर्णतः चरितार्थ करती है।
कार्यक्रम की एक विशेषता यह रही कि संगठन के युवा सदस्य निष्कृत कंकुलोल के नेतृत्व में प्रशिक्षित युवाओं की टीम ने दर्शकों को प्रत्येक चित्र की कथा और उसके नैतिक संदेश को विस्तार से समझाया। पाश्वि, विधि, देशना, हर्ष, मिलन, रणवीर, रिया, तनुष्का, हर्षिता और सोना सहित अनेक युवाओं ने इस सेवा कार्य में सक्रिय भागीदारी निभाई।
प्रदर्शनी के पश्चात बच्चों के लिए प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया, जिसमें विजेता प्रतिभागियों को ज्ञानवर्धक खेल प्रदान कर प्रोत्साहित किया गया। इससे न केवल बच्चों का मनोरंजन हुआ, बल्कि उनमें धार्मिक एवं नैतिक मूल्यों के प्रति रुचि भी जागृत हुई।
प्रदर्शनी के संयोजक धीरज कटारिया ने जानकारी दी कि पूज्य आचार्य श्री अरिहंतसागरसूरीश्वरजी महाराज की प्रेरणा से भगवान महावीर स्वामी के निर्वाण कल्याणक के 2550 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में इस प्रकार की प्रदर्शनी शहर के विभिन्न स्थानों पर आयोजित की जा रही है। यह इस श्रृंखला की सातवीं प्रदर्शनी है, जिसे जनमानस से निरंतर सराहना मिल रही है। उन्होंने बताया कि आगामी प्रदर्शनी सुशील धाम में आयोजित समर उपाधान के दौरान लगाई जाएगी।
इससे पूर्व जैन युवा संगठन द्वारा टाउन हॉल से फ्रीडम पार्क तक भगवान महावीर की भव्य रथयात्रा (वरघोड़ा) भी निकाली गई, जिसमें कल्याण मित्र परिवार की ओर से समवसरण की आकर्षक झांकी प्रस्तुत की गई। चारों दिशाओं में विराजमान भगवान की प्रतिमाओं ने श्रद्धालुओं और आम नागरिकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।
समापन के क्षणों में यह अनुभव स्पष्ट था कि यह प्रदर्शनी केवल चित्रों का संग्रह नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाला आध्यात्मिक संदेश है। भगवान महावीर का यह अमर संदेश—अहिंसा, आत्मसंयम और करुणा—आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना सदियों पूर्व था।
इस आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि जब कला और अध्यात्म का संगम होता है, तो वह समाज में सकारात्मक परिवर्तन की एक नई ज्योति प्रज्वलित कर देता है।